ओव्हरव्ह्यू ऑफ कॉम्प्युटर

कम्प्यूटर के विकास के चरण

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केवल उन्हीं निर्देशों का विकास किया जा रहा था जो कंप्यूटर द्वारा निश्चित कार्यों के लिए आवश्यक थे। कंप्यूटर में एक बाइनरी प्रोग्राम हुआ करता था, जो कंप्यूटर की निर्धारित प्रणालियों को नियंत्रित करता था। इस से कंप्यूटर के प्रोग्राम बनाने में बड़ी कठिनाई आती थी और इस से कंप्यूटर की गति और प्रयोग पर भी प्रभाव पड़ता था। कंप्यूटर में ‘वेक्यूम’ निर्वात टयूबों का इस्तेमाल किया जा रहा थ जिससे कंप्यूटर का आकार बहुत बड़ा होता था।